Grahan kya hai | ग्रहण क्या है | What is eclipse

विज्ञान के अनुसार ग्रहण एक खगोलीय घटना है. जिसमें सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी तीनों एक ही सीधी रेखा में आ जाते हैं, जिसके कारण चांद सूर्य की छाया से होकर गुजरता है और उसकी रोशनी फीकी पड़ जाती है. इसी घटना को ग्रहण कहा जाता है. ग्रहण आध्यात्मिक स्तर पर एक विशेष घटना है जिसका मानव जीवन पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है. जब खगोलीय पिंड जैसे पृथ्वी पर प्रकाश पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता है तो उसे पूर्ण ग्रहण कहते हैं और जब प्रकाश का स्रोत पूरी तरह अवरुद्ध नहीं होता तो उसे आंशिक ग्रहण कहते हैं.

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ग्रहण क्या है
ग्रहण क्या है

ग्रहण को देखना अशुभ माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि ग्रहण के दौरान खुले आसमान में नहीं रहना चाहिए. यहां तक की भगवान के मंदिरों के दरवाजे भी बंद कर दिए जाते हैं. ज्योतिषियों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि ग्रहण के दौरान भगवान पर भी कष्ट होता है. ग्रहण को लेकर एक पुरानी कहानी भी हमारे ग्रंथों में बताई गई है जो हम नीचे बता रहे हैं.

ग्रहण की पुरानी कहानी


ज्योतिषियों के बताए कहानी के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और दानवों के बीच अमृत के लिए युद्ध हुआ था. इस समुद्र मंथन में अमृत देवताओं को मिला परंतु उसे असुरों ने छीन लिया. असुरों के द्वारा किए गए इस कृत्य को ठीक करने के लिए और अमृत वापस पाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी नाम की सुंदर कन्या का रूप लेकर असुरों से अमृत वापस ले लिया. जब वह अमृत को लेकर देवताओं के पास पहुंचे और उन्हें अमृत पिलाने लगे तो राहु नामक असुर भी देवताओं के बीच जाकर अमृत पीने के लिए बैठ गया. जैसे ही वह अमृत पीकर उठा तो सूर्य और चंद्रमा को भनक लग गई कि वह असुर है तो विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से उसकी गर्दन धड़ से अलग कर दी. राहु नामक वह असुर जिसने अमृतपान कर लिया था, वह मरा नहीं बल्कि वह दो भाग सर और धर में विभाजित हो गया जिसे हम राहु और केतु ग्रह कहते हैं. ऐसा माना जाता है कि इसी घटना के कारण ग्रहण लगता है और कुछ देर के लिए सूर्य और चंद्रमा की चमक फीकी पड़ जाती है.

ग्रहण दो प्रकार के होते हैं.

1. सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse)
2. चंद्र ग्रहण (lunar Eclipse)  

सूर्य ग्रहण


पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमने के साथ-साथ अपने सौरमंडल के चारों ओर चक्कर भी लगाती है. चंद्रमा पृथ्वी का उपग्रह है और वह भी चक्कर लगाता है. जब चंद्रमा घूमते - घूमते सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है तो वह सूर्य की रौशनी को पृथ्वी तक नहीं पहुंचने देता है जिससे सूर्य हमें दिखाई नहीं देता. इसे ही हम सूर्यग्रहण कहते हैं. सूर्य ग्रहण ज्यादातर अमावस्या के दिन लगता है. सूर्य ग्रहण भी कई प्रकार का होता है जो नीचे बताया गया है.

सूर्य ग्रहण के प्रकार

  • चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है तो उसे हम पूर्ण सूर्य ग्रहण कहते हैं.
  • सूर्य का एक ही भाग चंद्रमा द्वारा ढका जाता है तो उसे आंशिक सूर्य ग्रहण कहते हैं.
  • सूर्य की रोशनी तिरछी दिखाई दे तो उसे कुंडलाकार सूर्यग्रहण कहते हैं.

  • चंद्र ग्रहण


    पृथ्वी सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है. जब यही परिक्रमा करते हुए पृथ्वी अपने उपग्रह चंद्रमा तथा सूर्य के बीच आ जाती है तो चंद्रमा पर पड़ने वाली सूर्य की किरणें रुक जाती है और चंद्रमा दिखना बंद हो जाता है. इसी घटना को हम चंद्रग्रहण कहते हैं. चंद्रग्रहण ज्यादातर पूर्णिमा के दिन लगता है. चंद्रग्रहण कई प्रकार के होते हैं जो नीचे बताया गया है. 

    चंद्रग्रहण के प्रकार

  • पृथ्वी सूर्य की किरणों को पूरी तरह रोक लेती है तो इसे पूर्ण चंद्रग्रहण कहते हैं.
  • पृथ्वी सूर्य की किरणों का एक भाग रोकती है और दूसरा भाग चाँद पर पड़ता रहता है  तो इसे हम आंशिक चंद्रग्रहण कहते हैं.
  • साल 2018 में कुल 5 ग्रहण लगेंगे, जिनमें तीन सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण होंगे.

    2018 में सूर्य ग्रहण लगने की तिथि:

    16 फरवरी 2018
    13 जुलाई 2018
    11 अगस्त 2018

    2018 में चंद्रग्रहण लगने की तिथि:

    31 जनवरी 2018
    27 जुलाई 2018


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